सुरभि शोध संस्थान ने सर्वप्रथम गोसदन का सफल
प्रयोग रामेश्वर गोशाला में किया. यह गोशाला वाराणसी की पंचक्रोशी परिक्रमा के
अंतर्गत तीसरे पड़ाव पर स्थित है. शहर के इसकी दूरी १६ किलोमीटर है. जहाँ गोशाला के
अलग-अलग भूखंडों में कतल से बचाए गए गोवंश को सुरक्षित किया जाता है और उन्हें
संरक्षित व उपयोगी बनाकर समग्र विकास का कार्य किया जाता है. ६० हजार गाय-बैल बचे.
कृषकों, गोपालकों, जरूरतमंदो, गाड़ीवाहनों को बैल दिये गए. बीमार, बूढें मरणासन्न
अनुपयोगी गोवंश को समुचित चिकित्सा तथा संतुलित दाना-पानी देकर उपयोगी बनाया गया.
उनके गोबर-गोमूत्र से ऊसर भूमि सुधारी, गोबर संयंत्र लगाये गए. गोबर गैस की स्लरी
और नडेप कम्पोस्ट खाद बनाकर खेतों को रासायनिक उर्वरकों के प्रदूषण से बचाया.
गोशाला की १०५ एकड़ भूमि पर कृषि कार्य हो रहा है. फल देने वाले वृक्ष लगाये गए,
इसके अतिरिक्त मेड़ो पर इमारती लकड़ी के दीर्घकालीन आय वाले वृक्ष भी लगाये गए....